क्या स्वाद है जिंदगी में

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शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

बेसन के करैले.....

   
बेसन के करैले---
सामग्री
करैले बनाने के लिए
एक कटोरी बेसन
हींग चुटकी भर
जीरा चौथाई चम्मच
नमक एक चम्मच
लाल मिर्च पिसी एक चम्मच
तेल एक छोटी चम्मच
गुनगुना पानी
बेसन में सब सामग्री मिलाकर गुनगुने पानी से अँगुलियों से मिलाते हुए गूँधें. बेसन की छोटी लोई को बीच से दबाकर  किनारों से चपटा करते हुए नाव सी आकृति दें. दो गोलों को हाथ से बेलन के आकार में लंबा करें. खौलते पिनी में बेसन से बने करैले और गट्टे डाल दें. अच्छी तरह पकने पर उतार लें. पानी से करैले और गट्टे उतार लें. पानी को फेंके नहीं. यह ग्रेवी बनाने के काम आयेगा.
ग्रेवी के लिए सामग्री -
मूँगफली भुनी और छिलके उतरी हुई 2 चम्मच
तिल एक चम्मच (कड़ाही मेंं सूखा भून लें.)
नारियल पाउडर एक चम्मच (हल्का सा भूनें. ध्यान रहे कि रंग न बदले)
धनिया पिसा एक चम्मच
नमक ऐक चम्मच
मिर्च एक चम्मच
हल्दी आधा चम्मच
इमली थोड़ी सी बीज निकाली हुई
जीरा 1/2चम्मच
राई 1/2 चम्मच
हींग चुटकी भर
मीठा नीम सात आठ पत्तियाँ
सूखी लाल मिर्च एक
हरी मिर्च एक
अदरक छोटा टुकड़ा
गरम मसाला आधा चम्मच
तेल  एक बड़ा चम्मच

तिल, मूँगफली और नारियल को दरदरा पीस लें. हरी मिर्च और अदरक बारीक काट लें. इमली को गरम पानी में भिगोकर मसल लें.
कड़ाही में तेल गरम करें. राई, हींग और मीठा नीम और साबुत लाल मिर्च हाथ से तोड़कर डालें. राई तड़कने पर तिल, मूँगफली का मसाला डालें . इमली का पल्प डालें. थोड़ा सा पानी डालें. अब नमक, मिर्च, हल्दी भी डाले और उबाल आने दें. फिर बेसन के करैले साबुत और गट्टों को गोल काटकर डालें. थोड़ा चलाकर करैले और गट्टे उबाला हुआ पानी भी डाल दें. ग्रेवी गाढ़ी होने पर गरम मसाला डालें. बारीक कटा धनिया डाल दें. चावल या चपाती के साथ परोसें.

नोट-
पारंपरिक राजस्थानी भोजन में गट्टे की सब्जी का विशेष स्थान है. गट्टे की सब्जी की एकरसता से उब गये हों तो बेसन की यह भरवाँ सब्जी बनाकर देखें. भरवाँ करैले के मसाले के साथ यह बेसन के करैले बनायें। स्वाद लाजवाब होगा

शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

आमेर की गूंजी और गाँठिये ......

जयपुर एक खूबसूरत पर्यटन  स्थल है और अपने देश ही नहीं ,  विदेशों में भी ख़ासा लोकप्रिय है। आंकड़ों के बिना भी  यहाँ की सड़कों पर घूमते सैलानियों को देख कर ही  अनुमान लगाया जा सकता है। कुछ समय के अंतराल में अपने शहर की खूबसूरती को पर्यटक की तरह निहारने में बड़ा आनंद है.  तेजी से चल रहे विस्तारण और विकास कार्यों  के कारण हर बार और अधिक खूबसूरत और नवीन नजर आता है।  कल ही जब आमेर होकर गुजरना पड़ा तो आँखें ठहर ही गयी पर्यटकों की मानिंद। आमेर महल की पृष्ठभूमि में  मावठे का साफ़ पारदर्शी जल जिसमे खूबसूरत बड़ी मछलियों का किलोल लुभा रहा था. 
 आमेर महल की चढ़ाई चढ़ते ही जयपुर के कछवाहा राजवंश   की कुलदेवी शिलामाता का मंदिर है। जयपुर के राजा मानसिंह बंगाल से मूर्ति लेकर आये थे हालाँकि और कई कथाएं भी प्रचलित हैं।  इस मंदिर की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यहाँ भोग लगाने के बाद ही मंदिर के पट खोले जाते हैं।  माता को गूंजी का भोग ही लगाया जाता है।  मावे और चीनी /बूरे  से बनी इस  मिठाई का स्वाद पेड़े जैसा ही होता है।  
आमेर घूमने आने वाले महल के आसपास  दुकानों से मावे की गूंजी और बेसन के गांठिए (नमकीन ) जरूर लेना चाहते हैं।  यदि आप आमेर भ्रमण कर चुके हैं तो इससे अवश्य परिचित होंगे और यदि आपको आमेर भ्रमण का मौका  मिले तो इसका स्वाद लेने से न चूकें !